उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्र 5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर उपवास रखकर अपने हक और मांगों को लेकर आवाज बुलंद करेंगे। लंबे समय से शिक्षा मित्र अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बीते वर्ष 5 सितंबर 2024 को राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में शिक्षा मित्रों ने विशाल धरना प्रदर्शन किया था। उस दौरान सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी समस्याओं पर मुख्यमंत्री स्तर पर वार्ता कर समाधान निकाला जाएगा। शिक्षा मित्रों ने सरकार के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए धरना स्थगित कर दिया था। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
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संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले आठ वर्षों से शिक्षा मित्रों के मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। इस आर्थिक तंगी और असुरक्षा के चलते कई शिक्षा मित्र हृदयाघात, मानसिक अवसाद और आत्महत्या जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। संगठन का आरोप है कि सरकार लगातार उदासीन बनी हुई है।
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शिक्षा मित्रों ने ऐलान किया है कि शिक्षक दिवस के दिन वे पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर उपवास रखकर जिला अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। इस ज्ञापन में उनकी मांगों का स्थायी समाधान करने और न्याय दिलाने की अपील होगी।
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आगरा के जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ, वीरेंद्र सिंह छौंकर ने कहा कि वर्तमान सरकार शिक्षा मित्रों के साथ बेहद उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रही है। पिछले आठ वर्षों में मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि महंगाई कई गुना बढ़ गई है। हजारों साथियों की जान जा चुकी है लेकिन सरकार अब भी संवेदनशील नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर को पूरे प्रदेश में शिक्षा मित्र उपवास रखकर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। यदि सरकार ने अब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो 18 सितंबर की अदालत की सुनवाई के बाद शिक्षा मित्र राजधानी लखनऊ में बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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संगठन का कहना है कि यह स्थिति बेहद विडंबनापूर्ण है कि एक ओर शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर दो दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे शिक्षा मित्र अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में उपवास रखकर सरकार से न्याय की गुहार लगाएंगे।
