लखनऊ: उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षामित्र संगठन लंबे समय से राज्य के शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान की कोशिशों में लगा है। इसी क्रम में हाल ही में संगठन के पदाधिकारी तीन दिनों तक राजधानी लखनऊ में रुके और लगातार अधिकारियों व मंत्रियों से मुलाकात कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास करते रहे। संगठन की ओर से बार-बार यह सवाल उठाया गया कि शिक्षामित्रों की समस्याओं का समाधान आखिर क्यों अटका हुआ है।
करीब एक साल पहले 3 जनवरी को शिक्षामित्रों से संबंधित शासनादेश जारी हुआ था, लेकिन ज़मीन पर उसका क्रियान्वयन न के बराबर है। इसी वजह से प्रदेश भर के शिक्षामित्रों में नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है। संगठन का कहना है कि 3 जनवरी से अब तक वे कई बार अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन परिणाम शून्य ही रहा।
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इसी बीच संगठन ने 7 दिसंबर को एक अहम बैठक करने का निर्णय लिया है। इस बैठक में भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि लखनऊ में तीन दिनों की मुलाकातें सकारात्मक रहीं, लेकिन जब तक ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उन मुलाकातों का कोई व्यावहारिक लाभ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 7 दिसंबर तक इंतजार किया जाएगा और यदि तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो उसी दिन सभी पदाधिकारी मिलकर आगे की कड़ी रणनीति तय करेंगे।
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शुक्ला ने यह भी कहा कि एक साल पहले प्रमुख सचिव सुंदरम द्वारा जारी आदेश को लागू न करना अधिकारियों के ढुलमुल रवैये का परिणाम है, जिससे शिक्षामित्रों में रोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभिन्न अधिकारियों से मुलाकात के दौरान सभी का रुख तो सकारात्मक रहा, लेकिन वास्तविक समस्या का समाधान तभी होगा जब आदेश लागू हो।
संगठन के अनुसार अब मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पाले में है। मानदेय वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर ही लिए जा सकते हैं, इसलिए संगठन चाहता है कि सरकार जल्द घोषणा करे ताकि शिक्षामित्रों में राहत आ सके और चल रहा विवाद भी समाप्त हो जाए।
शिव कुमार शुक्ला ने उम्मीद जताई कि 7 दिसंबर से पहले यदि सरकार कोई कदम उठाती है, तो स्थिति सामान्य हो सकती है। अन्यथा संगठन कड़ा निर्णय लेने के लिए तैयार है।
