लखनऊ: उत्तर प्रदेश बजट से पहले शिक्षामित्रों के मानदेय को लेकर हलचल तेज हो गई है। 11 तारीख को पेश होने वाले बजट से पहले उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारी राजधानी लखनऊ पहुँचे हुए हैं। संगठन के पदाधिकारी लगातार जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं और शिक्षामित्रों की प्रमुख मांग मानदेय वृद्धि को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने में जुटे हैं। इसी क्रम में प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला और प्रदेश महामंत्री सुशील कुमार यादव ने संगठन की तैयारियों और उम्मीदों को लेकर खुलकर बात की।
प्रश्न: बजट सत्र शुरू हो चुका है और 11 तारीख को बजट पेश होना है। संगठन की क्या तैयारियां चल रही हैं?
उत्तर (शिव कुमार शुक्ला): तैयारी जैसी कोई बात नहीं है, हम लोग तो लगातार संघर्षरत हैं। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ पिछले 25 वर्षों से शिक्षामित्रों के हितों के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। खासकर 2023 से संघर्ष और तेज हुआ है। इसी का परिणाम है कि सरकार से सामंजस्य बना और स्थानांतरण व कैशलेस चिकित्सा जैसी नीतियाँ लागू हुईं। इसके लिए हम सरकार का धन्यवाद करते हैं। अब हमारा प्रमुख मुद्दा मानदेय वृद्धि है। आर्थिक समस्या शिक्षामित्रों की सबसे बड़ी समस्या है और मानदेय बढ़ते ही बाकी समस्याओं का समाधान अपने आप हो जाएगा।
प्रश्न: बजट से पहले आप लोग लखनऊ पहुंचे हैं, क्या सरकार से मुलाकात हो रही है?
उत्तर: जी हां, लगातार मुलाकातें हो रही हैं। हमारे साथ प्रदेश महामंत्री सुशील कुमार यादव, प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेंद्र पचारा, सीतापुर और लखनऊ के जिला अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारी मौजूद हैं। हमारा उद्देश्य है कि इस बजट सत्र में शिक्षामित्रों को निराशा न हो और माननीय मुख्यमंत्री जी उनके जीवन को खुशहाल बनाने का निर्णय लें।
प्रश्न: 2017 में जो वादे किए गए थे, क्या अब उनके पूरे होने की उम्मीद है?
उत्तर: हम वादों की नहीं, समाधान की बात करते हैं। 2017 में जो समस्या उत्पन्न हुई थी, उसके समाधान के लिए हमने लगातार प्रयास किए हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि वर्तमान समय में सरकार के साथ समन्वय के माध्यम से इस समस्या का समाधान होगा और उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ इसमें अहम भूमिका निभाएगा।
प्रश्न: धरातल पर शिक्षामित्रों में बेचैनी और सवाल भी दिख रहे हैं, आप उन्हें क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर: मैं सभी साथियों से कहना चाहता हूँ कि धैर्य बनाए रखें। जहाँ इतना समय निकाला है, थोड़ा सा समय और निकालें। हम अपने लक्ष्य के बहुत करीब हैं। इस बजट से हमें पूरी उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आर्थिक समस्या का समाधान होगा। शिक्षा मंत्री जी ने भी लगातार आश्वासन दिया है।
प्रश्न: कैशलेस चिकित्सा और स्थानांतरण व्यवस्था को लेकर संगठन क्या कहता है?
उत्तर: इसके लिए हम माननीय मुख्यमंत्री जी और शिक्षा मंत्री जी का धन्यवाद करते हैं। कैशलेस चिकित्सा और स्थानांतरण व्यवस्था से शिक्षामित्रों को काफी सुविधा मिलेगी। अब हमारी मूल मांग मानदेय वृद्धि है।
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प्रश्न: मानदेय को लेकर तरह-तरह की खबरें चल रही हैं, 25 हजार या 3 हजार बढ़ोतरी की चर्चाएं हैं। इस पर क्या कहेंगे?
उत्तर (सुशील कुमार यादव): मैं सभी साथियों से कहना चाहता हूँ कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें। पिछले 7–8 वर्षों से अखबारों में अलग-अलग आंकड़े छपते रहे हैं। भरोसा तब करें जब कैबिनेट में प्रस्ताव पास हो जाए, बजट में व्यवस्था हो जाए और पैसा खाते में आए। हालांकि हमें उम्मीद है कि इस बजट में शिक्षामित्रों के लिए ठोस व्यवस्था होगी। आर्थिक समस्या सबसे बड़ी है और सरकार इसे जरूर समझ रही है।
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प्रश्न: अंत में सरकार से आपकी क्या अपेक्षा है?
उत्तर: सरकार से यही अपेक्षा है कि मानदेय वृद्धि का निर्णय लिया जाए। ₹10,000 में गुजारा करना बेहद मुश्किल है। हमें पूरा विश्वास है कि इस बजट में शिक्षामित्रों के कल्याण के लिए सकारात्मक फैसला लिया जाएगा।
अब निगाहें 11 तारीख पर टिकी हैं, जब योगी सरकार अपना बजट पेश करेगी और यह साफ़ होगा कि शिक्षामित्रों को क्या कोई बड़ी सौगात मिलती है या नहीं।
