लखनऊ: प्रदेश सरकार ने विधान परिषद में शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि के मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाने का संकेत दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षामित्रों के हितों को लेकर वह पूरी तरह संवेदनशील है और मानदेय बढ़ाने के विषय में गंभीरता से विचार किया जा रहा है। जल्द ही इस संबंध में निर्णय लिया जा सकता है।
प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्य डॉ. मानसिंह यादव ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में शिक्षामित्रों के मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब इस संबंध में सवाल उठाया जाता है तो जवाब में यह कहा जाता है कि मानदेय वृद्धि एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने पूरक प्रश्न करते हुए जानना चाहा कि आखिर सरकार की इस सतत प्रक्रिया की परिधि क्या है।
इस पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशकों के हितों को लेकर बेहद संवेदनशील है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और इस पर उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।
सरकार के इस बयान के बाद प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। अब सभी की निगाहें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
