TET अनिवार्यता पर शिक्षकों को बड़ी राहत की उम्मीद, देवेंद्र प्रताप सिंह का अहम बयान!


लखनऊ: टीईटी (टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट) की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से परेशान शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ती नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि टीईटी प्रकरण का समाधान शिक्षकों के पक्ष में होगा। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार के सकारात्मक रुख की सराहना की है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया था। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश समेत देशभर में लाखों शिक्षकों में चिंता का माहौल बन गया था। कई शिक्षक संगठनों ने इस आदेश का विरोध किया और छूट की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी थी।

इसी क्रम में देवेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का आग्रह किया था। सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए रिवीजन पिटीशन दाखिल करने का फैसला किया। उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।

इस मुद्दे पर केंद्र सरकार भी सक्रिय नजर आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों से गैर-टीईटी शिक्षकों से जुड़ी जानकारी मांगी है। इसमें शिक्षकों की संख्या, योग्यता, उम्र और प्रशिक्षण से संबंधित विवरण शामिल हैं। यह कदम टीईटी अनिवार्यता में संभावित छूट या संशोधन की दिशा में अहम माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में करीब 18 लाख 86 हजार शिक्षक ऐसे हैं जो अभी तक टीईटी पास नहीं कर पाए हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर यह संख्या लगभग 12 लाख के आसपास बताई जा रही है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा कराया जा रहा यह सर्वे शिक्षकों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों ही स्तरों पर सकारात्मक माहौल है और शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि या तो सुप्रीम कोर्ट से शिक्षकों के पक्ष में फैसला आएगा या फिर विधेयक अथवा ऑर्डिनेंस के माध्यम से टीईटी अनिवार्यता में राहत दी जाएगी।

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उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई होगी, तब राज्य सरकार की ओर से मजबूत पैरवी की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भी आश्वासन दिया है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। 16 जनवरी तक सभी राज्यों से आंकड़े मंगाए गए हैं, जिसके बाद अगली बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

देवेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार सरकार के पास दो विकल्प हैं। पहला, कोर्ट के माध्यम से समाधान और दूसरा, कानून में संशोधन। यदि संसद सत्र के दौरान जरूरत पड़ी तो संशोधन विधेयक लाया जाएगा और सत्र न होने की स्थिति में ऑर्डिनेंस के जरिए राहत दी जा सकती है।

कुल मिलाकर, देवेंद्र प्रताप सिंह का बयान शिक्षकों के बीच नई उम्मीद जगाता है। केंद्र सरकार की रिपोर्ट मांग और प्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका दोनों ही सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। यदि विधेयक या ऑर्डिनेंस के जरिए समाधान निकलता है तो पुराने शिक्षकों की सेवाएं सुरक्षित रहेंगी और प्रमोशन में आने वाली बाधाएं भी दूर होंगी। इससे शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता आएगी और शिक्षक समुदाय को बड़ी राहत मिलेगी।

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