महाराष्ट्र: जनजातीय विकास विभाग ने आश्रम स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को लेकर एक अहम सरकारी आदेश (GR) जारी किया है। आदेश के अनुसार, जो शिक्षक वर्ष 2009 में लागू हुए बच्चों के मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) से पहले नियुक्त हुए थे और जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 5 साल से अधिक समय शेष है, उन्हें दो वर्ष के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।
नए नियम के तहत संबंधित शिक्षकों को 1 सितंबर 2027 तक TET पास करनी होगी। तय समयसीमा में परीक्षा उत्तीर्ण न करने की स्थिति में उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।
किन पर लागू होगा आदेश
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आदेश जनजातीय विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले सरकारी सहायता प्राप्त आश्रम स्कूलों पर लागू होगा। राज्य में ऐसे लगभग 480 आश्रम स्कूल संचालित हैं। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 साल से कम समय बचा है, उन्हें इस नियम से छूट दी गई है—बशर्ते वे किसी प्रकार के प्रमोशन की मांग न कर रहे हों।सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कदम
यह आदेश सितंबर 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जारी किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए TET क्वालिफाई करना अनिवार्य है और यह नियम केवल नए शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर भी पूर्वव्यापी (retrospective) रूप से लागू होगा।महाराष्ट्र में किसी विभाग द्वारा इस फैसले के बाद जारी किया गया यह पहला स्पष्ट आदेश माना जा रहा है।
शिक्षकों में चिंता
इस फैसले से शिक्षकों में असमंजस और चिंता बढ़ गई है। शिक्षकों का कहना है कि महाराष्ट्र में TET वर्ष 2013 से पहले लागू नहीं थी, ऐसे में उससे पहले नियुक्त हजारों शिक्षकों के लिए सीमित समय में TET पास करना चुनौतीपूर्ण होगा।महाराष्ट्र स्कूल प्रिंसिपल्स एसोसिएशन के महेंद्र गणपुले ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने TET को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने पर काफी समय तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उनका कहना है कि जनजातीय विकास विभाग का यह आदेश संकेत देता है कि राज्य सरकार TET को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे पूरे राज्य के शिक्षकों में भ्रम और नौकरी को लेकर आशंका बढ़ गई है।
अब इस मुद्दे पर राज्य सरकार आगे क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, राज्य के शिक्षक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
