Hapur: क्षेत्र के प्राइमरी स्कूलों में निपुण एसेसमेंट परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बच्चों की भाषा और गणित की दक्षता जांचने के लिए प्रस्तावित निपुण एसेसमेंट इसी माह आयोजित होनी है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है।
क्षेत्र में तैनात अधिकतर प्राथमिक शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक नवंबर माह से ही एसआईआर, पंचायत बीएलओ और अब विधानसभा बीएलओ के कार्यों में लगाए गए हैं। ऐसे में विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई स्कूलों में सिर्फ एक या दो शिक्षकों के भरोसे किसी तरह 10 से 16 दिसंबर तक अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं संपन्न कराई जा सकीं।
इसके बाद विद्यालय बहुत कम दिनों के लिए खुल सके। शीतलहर और कड़ाके की ठंड के चलते दिसंबर माह से लगातार अवकाश घोषित होते रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए स्कूलों की छुट्टियां और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि इस दौरान नियमित कक्षाएं न चल पाने के कारण पाठ्यक्रम पूरा कराना बेहद मुश्किल हो गया है।
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शिक्षकों के अनुसार बच्चों को न तो निपुण एसेसमेंट के लिए भाषा और गणित की पर्याप्त तैयारी कराई जा सकी है और न ही अभ्यास का पर्याप्त अवसर मिला है। इस स्थिति को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
गौरतलब है कि क्षेत्र के प्राइमरी विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की हिन्दी और गणित की दक्षता जांचने के लिए निपुण एसेसमेंट प्रस्तावित है, जिसमें डीएलएड प्रशिक्षु विद्यालयों में जाकर निपुण लक्ष्य ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आकलन करेंगे।
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लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब जिले के लगभग 80 प्रतिशत शिक्षकों को विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत बीएलओ ड्यूटी में लगा दिया गया है, तो विद्यालयों में पढ़ाई कैसे होगी। शिक्षक प्रशासनिक कार्यों में उलझे हुए हैं और बच्चों की शिक्षा लगातार प्रभावित हो रही है।
ऐसे हालात में निपुण एसेसमेंट परीक्षा में बच्चों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करना कितना व्यावहारिक है, यह एक गंभीर सवाल बनकर सामने आ रहा है।
