दिल्ली: नई दिल्ली में अखिल भारतीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ समेत कई अन्य शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाक़ात की। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग रखी। इस मुलाक़ात का नेतृत्व एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने किया।
प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्रालय से संविधान संशोधन बिल सदन में लाकर स्वीकृत कराने का अनुरोध भी रखा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। योगेश त्यागी ने बताया कि शिक्षक संगठन इस मामले पर लंबे समय से प्रयासरत हैं और जल्द ही सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।
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शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी पास करने की कोई बाध्यता नहीं थी। यदि यह अनिवार्य होता तो शिक्षक उस समय परीक्षा दे देते। अब वर्षों बाद अचानक नियम लागू करना उनकी सेवा और क्षमता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
शिक्षकनेताओं ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाएं या खुद परीक्षा की तैयारी करें, क्योंकि दोनों एक साथ सम्भव नहीं है।
शिक्षकों ने कई बार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए, ज्ञापन सौंपे और दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन भी किया। संगठन का कहना है कि कोर्ट के फैसले के बाद से ही लाखों शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हैं और समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई इस मुलाक़ात को काफी सकारात्मक माना जा रहा है। शिक्षकों के बीच आशा की नई किरण जगी है कि जल्द ही इस मुद्दे पर सरकार की ओर से ठोस कदम उठाया जाएगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस दिशा में क्या निर्णय सामने आता है।
