लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में ऑनलाइन हाजिरी को अनिवार्य किए जाने के बाद एक बार फिर शिक्षकों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। अपर मुख्य सचिव शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा स्कूल शिक्षा निदेशक के नाम जारी शासनादेश में शिक्षकों को हर हाल में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों में नाराज़गी बढ़ गई है और विरोध की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
इससे पहले भी प्रदेश में ऑनलाइन हाजिरी को लेकर आदेश जारी किया गया था, जिसका शिक्षकों ने जबरदस्त विरोध किया था। तब सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था और एक समिति का गठन किया गया था। इस बार शासन की ओर से यह व्यवस्था लागू करते हुए शिक्षकों को विद्यालय शुरू होने के एक घंटे के भीतर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने का समय दिया गया है, लेकिन उपस्थिति पूरी तरह ऑनलाइन ही होगी।
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इस मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी ने स्पष्ट कहा कि जब तक शिक्षकों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक संगठन इस व्यवस्था का बहिष्कार करेगा। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को अपर मुख्य सचिव शिक्षा की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षकों की प्रमुख समस्याएं रखी गई थीं। इनमें 18 आकस्मिक अवकाश, 31 अर्जित अवकाश, मुख्यमंत्री द्वारा घोषित चिकित्सा सुविधा का लाभ और अंतर जनपदीय शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर स्थानांतरण जैसी मांगें शामिल हैं।
योगेश त्यागी ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को किसी अतिरिक्त बजट की भी आवश्यकता नहीं है, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष मुख्य सचिव के साथ हुई वार्ता में पहले शिक्षकों की समस्याओं के समाधान और उसके बाद ऑनलाइन उपस्थिति लागू करने की बात कही गई थी, लेकिन वर्तमान में इस व्यवस्था को जबरन थोपने का प्रयास किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय शिक्षक संगठन मोर्चा के सभी घटक संगठनों से इस विषय पर बातचीत हो चुकी है और सभी इस निर्णय पर एकमत हैं कि जब तक शिक्षकों की मूल समस्याओं का निराकरण नहीं होगा, तब तक ऑनलाइन हाजिरी का बहिष्कार किया जाएगा। संगठन की ओर से इस संबंध में शासन और प्रशासन को ईमेल तथा पंजीकृत डाक के माध्यम से पत्र भी भेज दिया गया है।
एक घंटे के भीतर हाजिरी दर्ज करने के प्रावधान पर सवाल उठाते हुए योगेश त्यागी ने कहा कि यह व्यवस्था शिक्षकों पर दंडात्मक कार्रवाई का रास्ता खोलती है। यदि कोई शिक्षक 15 या 30 मिनट देरी से पहुंचता है तो उसे अनुपस्थित या विलंबित दिखाया जाएगा, जिसके आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इससे जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा शिक्षकों के शोषण की आशंका बढ़ जाती है।
टेट अनिवार्यता के मुद्दे पर उन्होंने जानकारी दी कि शिक्षा मंत्री से हुई मुलाकात में संगठन को आश्वासन मिला है कि न्यायालय में चल रही प्रक्रिया में विभाग शिक्षकों के साथ खड़ा रहेगा और भविष्य में यदि कोई विधायी स्थिति बनेगी तो सरकार अपने स्तर से हर संभव प्रयास करेगी।
फिलहाल ऑनलाइन हाजिरी को लेकर शिक्षकों में असंतोष बना हुआ है और यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश में आंदोलन तेज होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
