लखनऊ: उत्तराखंड सरकार द्वारा दस वर्ष पूरे कर चुके कर्मियों के नियमितीकरण की संशोधित नियमावली लागू करने के बाद अब उत्तर प्रदेश के NHM, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों में भी उम्मीदें बढ़ गई हैं। पड़ोसी राज्य में भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद यूपी के कर्मचारी अब अपेक्षा कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसी प्रकार कोई बड़ा निर्णय लें।
कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियमितीकरण या कम से कम समान कार्य का समान वेतन जैसी सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका तर्क है कि जब अन्य राज्यों—जैसे उत्तराखंड, भोपाल, छत्तीसगढ़ और हरियाणा—में NHM कर्मचारियों को लाभ दिया जा रहा है, डीए बढ़ाया जा रहा है और कई जगह नियमितीकरण भी किया जा रहा है, तो यूपी में यह प्रक्रिया क्यों लंबित है।
प्रदेश अध्यक्ष मयंक प्रताप सिंह ने बताया कि पहले केंद्र सरकार की ओर से यह कहा गया था कि स्वास्थ्य राज्य की नीति है और राज्य ही इस पर निर्णय लेगा। अब जब कई राज्यों ने स्पष्ट रूप से यह दिखा दिया है कि NHM कर्मचारियों के नियमितीकरण का अधिकार राज्य सरकारों के पास ही है, तो उत्तर प्रदेश को भी इस दिशा में कदम उठाना चाहिए।
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मयंक सिंह ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में लिखित आदेश के साथ नियमितीकरण लागू होने के बाद स्पष्ट है कि यह पूरी तरह राज्य का विषय है। इसलिए उत्तर प्रदेश में भी वही सरकार होने के बावजूद कर्मचारियों की उपेक्षा समझ से परे है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि अन्य राज्यों की तरह यूपी में भी NHM कर्मियों को स्थायी किया जाए और जब तक यह संभव न हो, तब तक समान कार्य का समान वेतन लागू किया जाए।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के पक्ष में दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट ने साफ कहा है कि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को अनिश्चितकाल तक संविदा पर नहीं रखा जा सकता। इसके बाद पंजाब और हिमाचल की सरकारों ने नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन यूपी में अभी कोई ठोस कदम नहीं दिख रहा।
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मयंक सिंह ने यह भी चिंता जताई कि राज्य सरकार द्वारा बनाई जा रही नई कॉरपोरेशन में कहीं NHM कर्मचारियों को शामिल न किया जाए और उन्हें हाशिये पर न धकेल दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संविदा कर्मियों की बात कर रही है, तो NHM कर्मियों को भी उसी में शामिल किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सबसे अधिक जोखिमपूर्ण कार्य करने के बावजूद NHM कर्मचारियों को अभी तक कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल सकी है, जबकि हाल ही में होमगार्ड के लिए यह घोषणा की गई है। उन्होंने कहा कि कम वेतन के कारण कई कर्मचारी इलाज न करा पाने की स्थिति में अपनी जान तक गंवा देते हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि चुनाव से पहले यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो वे आंदोलन सहित कोई बड़ा फैसला लेने पर विचार कर सकते हैं।
