मानदेय वृद्धि की घोषणाओं के बाद अब शिक्षामित्रों को कैबिनेट बैठक से उम्मीदें


लखनऊ: उत्तरप्रदेश के शिक्षामित्र इस समय अपने मानदेय वृद्धि को लेकर बड़ी खबर का इंतजार कर रहे हैं। स्थानांतरण की प्रक्रिया अब धरातल पर चल रही है, लेकिन मानदेय बढ़ोतरी को लेकर अभी तक कोई ठोस शासनादेश सामने नहीं आया है। इसी वजह से प्रदेश भर के शिक्षामित्रों की नजरें अब सरकार और आने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई हैं।

दरअसल, 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानदेय वृद्धि को लेकर एक बड़ी घोषणा की थी। इसके बाद 6 दिसंबर 2025 को भी मुख्यमंत्री ने यह कहते हुए दोहराया कि उत्तर प्रदेश के संविदा कर्मचारी और शिक्षक वर्ग के मानदेय में बढ़ोतरी की जाएगी। इन बयानों के बाद शिक्षामित्रों की उम्मीदें और भी मजबूत हुई हैं।

संगठन के पदाधिकारी लगातार मुख्यमंत्री से मुलाकात का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब सरकार को अपने फैसले को अमलीजामा पहनाते हुए जल्द से जल्द शासनादेश जारी करना चाहिए। शिक्षामित्रों का मानना है कि जब यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था, तब कोर्ट की ओर से भी साफ कहा गया था कि इस विषय में फैसला सरकार को ही करना है और यह निर्णय कैबिनेट बैठक के माध्यम से लिया जा सकता है।

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अब स्थिति यह है कि शिक्षामित्रों ने कोर्ट से उम्मीद छोड़कर पूरी तरह से सरकार की ओर देखना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही मानदेय बढ़ाने की मंशा जता चुके हैं, ऐसे में अब अगला कदम शासनादेश जारी करना होना चाहिए।

शिक्षामित्रों का यह भी कहना है कि हर कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगती है, इसलिए कम से कम अगली बैठक में उनके मानदेय वृद्धि के मुद्दे को जरूर शामिल किया जाना चाहिए। संगठन की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि यह मुद्दा प्राथमिकता के आधार पर रखा जा सके।

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प्रदेश के शिक्षामित्रों का कहना है कि वर्तमान में मिलने वाला लगभग 10,000 रुपये का मानदेय उनकी जिम्मेदारियों और बढ़ते खर्चों के मुकाबले काफी कम है। ऐसे में जीवन यापन करना मुश्किल होता जा रहा है। संगठन का तर्क है कि मानदेय वृद्धि से न सिर्फ शिक्षामित्रों की आर्थिक समस्याएं कम होंगी, बल्कि वे अपने कार्य को और बेहतर तरीके से कर सकेंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाली कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संगठन से मुलाकात के बाद इस दिशा में कोई बड़ा फैसला करेंगे। इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं, जिन पर पूरे प्रदेश के शिक्षामित्रों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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