लखनऊ: 24 नवंबर को देशभर के शिक्षकों ने दिल्ली में एकजुट होकर TET अनिवार्यता के विरोध में ऐतिहासिक महाप्रदर्शन किया। यह कार्यक्रम इतना विशाल और सफल रहा कि जंतर-मंतर पर कदम रखने तक की जगह नहीं बची थी। उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के सभी राज्यों से शिक्षक एक बैनर तले अपनी आवाज बुलंद करने पहुंचे।
इस बड़े प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिक्षक नेता योगेश त्यागी ने बताया कि यह सिर्फ भीड़ का जमावड़ा नहीं था, बल्कि अपने हकों की लड़ाई में एकजुट होकर आगे बढ़ने का मजबूत संकल्प था।
प्रदर्शन में कैसा रहा माहौल?
योगेश त्यागी के मुताबिक—
- विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों ने अपनी-अपनी भाषाओं में नारे लगाए।
- मंच पर वरिष्ठ अधिवक्ता संजय विक्रम हेगड़े ने भी शिक्षकों को न्यायालय की प्रक्रिया और पुनर्विचार याचिका पर जानकारी दी।
- शिक्षकों में इस बात का स्पष्ट विश्वास दिखा कि न्यायालय एवं सरकार दोनों से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधि मंडल ने मंत्रालय जाकर ज्ञापन सौंपा।
- अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि शिक्षा मंत्री के आने पर विषय पर गंभीर मंथन होगा।
- योगेश त्यागी ने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि सरकार शिक्षकों के साथ न्याय करेगी।
- साथ ही उन्होंने बताया कि पुनर्विचार याचिका पर भी सकारात्मक परिणाम की आशा है, क्योंकि लाखों शिक्षकों की आजीविका दांव पर है।
आगे की राह क्या?
योगेश त्यागी का कहना है—
- यह आंदोलन शिक्षकों की जीत के बेहद करीब है।
- उत्तर प्रदेश के शिक्षक विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी प्रदर्शन में पहुंचकर समर्थन दिया और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार शिक्षकों के हित में पूरा प्रयास करेगी।
- योगी सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका दाखिल किया जाना भी इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
24 नवंबर का यह महाप्रदर्शन न केवल सफल रहा, बल्कि इसने सरकार और न्यायालय दोनों के सामने शिक्षकों की एकजुटता और स्थिति की गंभीरता को मजबूती से रखा है। शिक्षक अब इस संघर्ष की जीत के और करीब दिख रहे हैं।
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